मां की ममता का ऐसा सिला : गोद लिए बेटे ने कराई हत्या, 40 हजार में दी सुपारी

छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरसींवा थाना क्षेत्र में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक बुजुर्ग महिला की हत्या उसके सौतेले बेटे और बहू ने करवा दी। आरोपियों ने गांव के दो युवकों को 40 हजार रुपए में सुपारी देकर बुजुर्ग की गला घोंटकर हत्या करवा दी।
मंझली बाई को जमीन के लिए बनाया था निशाना
मृतका मंझली बाई (80) पड़रीपाली गांव की रहने वाली थीं। उन्होंने भजनलाल (48) को गोद लिया था और उसकी शादी नोनी बाई (45) से करवाई थी। कुछ साल पहले भजनलाल ने धोखे से मंझली बाई की 6 डिसमिल जमीन अपने नाम करा ली, जो सड़क किनारे स्थित थी।

बुजुर्ग महिला ने की थी बेटे की शिकायत
जब मंझली बाई को बेटे की धोखेबाजी का पता चला, तो उन्होंने इसकी शिकायत थाने और कलेक्टर से की। जमीन हड़पने की शिकायत लेकर वह लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही थीं। इससे नाराज होकर बेटा और बहू ने उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
हत्या से एक दिन पहले भी की थी शिकायत
हत्या से एक दिन पहले मंझली बाई ने बेटे पर मारपीट का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत की थी। इसी के बाद बेटे-बहू ने हत्या की साजिश रच डाली। उन्होंने गांव के राजा कुर्रे (20) को हत्या के लिए 40 हजार रुपए की सुपारी दी।
रस्सी से गला घोंटकर की हत्या
राजा कुर्रे ने अपने साथी साजन दास (24) को भी साथ मिला लिया। 15-16 जुलाई की रात दोनों भजनलाल के घर पहुंचे, जहां भजनलाल और उसकी पत्नी भी मौजूद थे। दोनों आरोपी बुजुर्ग महिला के कमरे में घुसे और रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद वे खिड़की के रास्ते फरार हो गए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला राज
अगले दिन महिला की मौत को शुरू में सामान्य समझा गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले पर चोट के निशान मिले। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और 19 जुलाई को महिला के सौतेले बेटे को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसने जुर्म कबूल कर लिया।
αñåαñ░αÑïαñ¬αÑÇ αñ¼αÑçαñƒαÑç αñ¿αÑç αñ¬αñ╣αñ▓αÑç αñ¬αÑüαñ▓αñ┐αñ╕ αñòαÑï αñùαÑüαñ«αñ░αñ╛αñ╣ αñòαñ┐αñ»αñ╛, αñ▓αÑçαñòαñ┐αñ¿ αñ╕αñûαÑìαññαÑÇ αñ╕αÑç αñ¬αÑéαñ¢αññαñ╛αñ¢ αñòαÑç αñ¼αñ╛αñª αñ«αñ░αÑìαñíαñ░ αñòαÑç αñ╕αñ╛αñ░αÑç αñ░αñ╛αñ£ αñëαñùαñ▓ αñªαñ┐αñÅαÑñ αñ¬αÑüαñ▓αñ┐αñ╕ αñ¿αÑç αñåαñ░αÑïαñ¬αÑÇ αñòαÑÇ αñ¬αññαÑìαñ¿αÑÇ αñöαñ░ 2 αñ╕αÑüαñ¬αñ╛αñ░αÑÇ αñòαñ┐αñ▓αñ░ αñòαÑï αñ¡αÑÇ αñùαñ┐αñ░αñ½αÑìαññαñ╛αñ░ αñòαñ░ αñòαÑïαñ░αÑìαñƒ αñ«αÑçαñé αñ¬αÑçαñ╢ αñòαñ┐αñ»αñ╛αÑñ αñòαÑïαñ░αÑìαñƒ αñ¿αÑç αñÜαñ╛αñ░αÑïαñé αñòαÑï αñ£αÑçαñ▓ αñ¡αÑçαñ£ αñªαñ┐αñ»αñ╛ αñ╣αÑêαÑñ αñ¬αÑüαñ▓αñ┐αñ╕ αñåαñùαÑç αñòαÑÇ αñ£αñ╛αñéαñÜ αñ«αÑçαñé αñ£αÑüαñƒαÑÇ αñ╣αÑêαÑñ – αñ¿αñ┐αñ«αñ┐αñ╖αñ╛ αñ¬αñ╛αñéαñíαÑçαñ», ASP, αñ╕αñ╛αñ░αñéαñùαñó-αñ¼αñ┐αñ▓αñ╛αñêαñùαñóαñ╝















