झारखंड के पूर्व CM शिबू सोरेन का निधन : लंबी बीमारी के बाद 81 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, संघर्षों से भरा रहा जीवन

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उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था जिससे उनके शरीर के बाएं हिस्से में पैरालिसिस हो गया था। वे लंबे समय से किडनी की बीमारी, डायबिटीज और हार्ट की समस्याओं से जूझ रहे थे। 2023 से ही वे डायलिसिस पर थे।
झारखंड आंदोलन के जननायक
शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और आदिवासी चेतना के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने आदिवासियों के हक और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर दशकों लंबा संघर्ष किया। 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की और आदिवासी समुदाय को महाजनी शोषण, सूदखोरी और जमीन कब्जाने जैसी समस्याओं के खिलाफ संगठित किया। वे आदिवासियों के हक के लिए एक जनआंदोलन के अगुवा बने।
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शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ के नेमरा गांव में हुआ था। मात्र 13 साल की उम्र में उनके पिता की हत्या महाजनों ने कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और आदिवासियों को संगठित कर सूदखोरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
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राजनीतिक सफर: तीन बार मुख्यमंत्री, सात बार सांसद
1980 में पहली बार दुमका से सांसद बने।
1985 में जामा विधानसभा से विधायक चुने गए।
2004 में यूपीए सरकार में केंद्रीय कोयला मंत्री बने।
तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने, लेकिन कुल मिलाकर सिर्फ 10 महीने 10 दिन ही पद पर रह पाए:
पहली बार: 2 मार्च 2005 से 12 मार्च 2005 (10 दिन)
दूसरी बार: 27 अगस्त 2008 से 18 जनवरी 2009 (लगभग 5 महीने)
तीसरी बार: 30 दिसंबर 2009 से 31 मई 2010 (लगभग 5 महीने)
2014 में लोकसभा और 2020 से राज्यसभा सांसद रहे।
पारिवारिक और राजनीतिक विरासत
शिबू सोरेन का राजनीतिक प्रभाव सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके पूरे परिवार ने भी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है:
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आंदोलन से उठकर सत्ता तक, फिर भी संघर्ष जारी रहा
हालांकि शिबू सोरेन झारखंड राज्य के निर्माण के नायक माने जाते हैं, लेकिन उनका मुख्यमंत्री कार्यकाल राजनीतिक अस्थिरता और गठबंधन के दबावों के चलते कभी लंबा नहीं चल सका। वे हर बार शपथ तो लेते थे, लेकिन बहुमत या चुनावी हार के चलते कुर्सी छोड़नी पड़ी।
निधन से झारखंड में शोक की लहर
शिबू सोरेन के निधन की खबर से झारखंड और देशभर में शोक की लहर है। झारखंड की राजनीति में उन्होंने जो योगदान दिया, वह सदैव याद किया जाएगा। उनकी हालत बिगड़ने के बाद सीएम हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन, बसंत सोरेन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल संतोष गंगवार भी गंगाराम अस्पताल पहुंचे थे।
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