बिहार वोटर लिस्ट विवाद: कपिल सिब्बल बोले- एक हील क्षेत्र में 12 लोगों को मृत घोषित किया; SC ने चुनाव आयोग से कहा- सवालों के लिए रहें तैयार

नई दिल्ली। बिहार में वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि लाखों मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए और पूरी प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं हुआ। चुनाव आयोग ने इसे महज ड्राफ्ट रोल बताया और कहा कि सुधार की प्रक्रिया जारी है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्ट किया कि मृत घोषित किए गए जीवित लोगों के मामलों में जवाब दिया जाए।

सिब्बल का आरोप- जीवित लोगों को मृत दिखाया गया

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने बताया कि एक छोटे से निर्वाचन क्षेत्र में 12 जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है। उनका कहना था कि बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) ने अपना काम ठीक से नहीं किया। सिब्बल ने यह भी कहा कि मृतक को जीवित दिखाने की जानकारी चुनाव आयोग को दी गई थी और इसके प्रमाण के तौर पर पत्नी का बयान और वीडियो भी मौजूद है।

उन्होंने तर्क दिया कि मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण में नियमों के तहत फॉर्म 4 घर-घर भेजा जाना चाहिए था, लेकिन न तो यह किया गया और न ही दस्तावेज सही तरीके से लिए गए, जिससे नियम 10 और 12 का उल्लंघन हुआ।

संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी का आरोप

सिब्बल ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत किसी का नाम हटाने के लिए प्रमाण देने की जिम्मेदारी आपत्ति करने वाले की है, लेकिन SIR में उल्टा मतदाताओं से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करते हुए BLO और अन्य अधिकारियों ने मनमानी की है।

वहीं, याचिकाकर्ता पक्ष के वकील गोपाल शंकर नारायण ने दावा किया कि ड्राफ्ट रोल से 65 लाख लोगों के नाम हटाए गए, लेकिन चुनाव आयोग ने इसकी सूची तक उपलब्ध नहीं कराई।

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चुनाव आयोग ने किया बचाव

चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि यह ड्राफ्ट रोल है और जिन लोगों को आपत्ति है, वे सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। उनका तर्क था कि इतने बड़े पैमाने की प्रक्रिया में कुछ त्रुटियां होना स्वाभाविक है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि यदि कोई जीवित व्यक्ति मृत घोषित कर दिया गया है, तो उसे अदालत में लाया जाए और गलती सुधारी जाए।

हालांकि, सिब्बल ने कहा कि यह समस्या लगभग हर बूथ पर है, इसलिए सभी को कोर्ट में लाना संभव नहीं। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या याचिकाकर्ता SIR के अस्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं या केवल प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं, जिस पर सिब्बल ने कहा कि वे केवल प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं।

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By Wasif Khan

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