हम भारत को सजा नहीं देना चाहते लेकिन... रूस से तेल खरीदने पर बोला अमेरिका, ट्रंप के ऊर्जा मंत्री ने कहा- हमारा मकसद यूक्रेन जंग खत्म कराना

वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भारत से अपील की है कि, वह रूस से कच्चे तेल का आयात करने पर दोबारा विचार करे। उन्होंने साफ कहा कि, अमेरिका भारत को सजा नहीं देना चाहता, बल्कि युद्ध खत्म कराना चाहता है और भारत के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहता है।
भारत हमारा शानदार सहयोगी है : अमेरिकी ऊर्जा मंत्री
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उन्होंने यह भी कहा कि, अमेरिका प्राकृतिक गैस, कोयला, परमाणु ऊर्जा और स्वच्छ रसोई ईंधन जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है।
रूस से तेल खरीदने पर आपत्ति
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टैरिफ विवाद और भारत की स्थिति
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने अगस्त 2025 में रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। इससे पहले ही 25% रेसीप्रोकल टैरिफ लगाया गया था, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया।
भारत ने पहले ही साफ कर दिया है कि उसका ऊर्जा आयात राष्ट्रीय हित और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार तय होता है। रूस से सस्ते तेल की वजह से भारत ने पिछले कुछ वर्षों में आयात बढ़ा दिया, जिससे सरकारी तेल कंपनियों के मुनाफे में जबरदस्त उछाल देखने को मिला।
रूस का पक्ष- हमारे तेल का कोई विकल्प नहीं
रूस ने अगस्त में कहा था कि, उसके कच्चे तेल का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि यह सबसे सस्ता है। रूसी राजनयिक रोमन बाबुश्किन ने दावा किया था कि, भारत को रूसी तेल पर लगभग 5% छूट मिल रही है, जिससे उसे भारी मुनाफा हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि, अमेरिका द्वारा भारत पर डाला जा रहा दबाव गलत है।
भारतीय कंपनियों का बढ़ा मुनाफा
- 2020 में भारत केवल 1.7% तेल रूस से आयात करता था।
- 2025 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 35.1% हो गई।
- वित्त वर्ष 2022-23 में इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल का कुल मुनाफा ₹3,400 करोड़ था।
- 2023-24 में यही मुनाफा बढ़कर ₹86,000 करोड़ हो गया।
- 2024-25 में मुनाफा घटकर ₹33,602 करोड़ रह गया, लेकिन यह अब भी 2022-23 से काफी ज्यादा है।














