अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को बताया गैरकानूनी, राष्ट्रपति बोले- टैरिफ हटे तो तबाह हो जाएगा अमेरिका

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राष्ट्रपति के पास असीमित टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं
वॉशिंगटन डीसी स्थित यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने अपने फैसले में कहा कि, 1977 का इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को कई आपातकालीन कदम उठाने की अनुमति देता है, लेकिन इसमें टैरिफ या कर लगाने की शक्ति शामिल नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार टैक्स और शुल्क लगाने की शक्ति केवल कांग्रेस के पास है।
ट्रंप बोले- टैरिफ हटे तो तबाह हो जाएगा अमेरिका
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किन टैरिफ पर असर पड़ा?
यह फैसला मुख्य रूप से उन टैरिफ पर लागू होता है जिन्हें ट्रंप ने आपातकाल का हवाला देकर चीन, कनाडा और मेक्सिको जैसे देशों पर लगाया था। इन टैरिफ में 10% से 50% तक का आयात शुल्क शामिल था। हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए शुल्क इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे।
भारत पर भी बड़ा असर
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत पर 50% टैरिफ लगाया था, जो 27 अगस्त से लागू हुआ। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया शुल्क भारत के लगभग 5.4 लाख करोड़ रुपए के निर्यात को प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका में बिकने वाले कपड़े, जेम्स-ज्वेलरी, फर्नीचर और सी-फूड जैसे भारतीय उत्पाद अब महंगे हो जाएंगे। इनकी मांग में लगभग 70% तक की कमी आ सकती है।
वहीं, चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे देश कम टैरिफ के चलते अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी पर कब्जा कर सकते हैं।
रूस से तेल आयात और टैरिफ विवाद
- ट्रंप ने यह टैरिफ भारत पर इसलिए लगाया क्योंकि भारत रूस से लगातार बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है।
- अगस्त 2025 तक भारत रोजाना औसतन 17.8 लाख बैरल रूसी तेल खरीद रहा है।
- पिछले दो सालों से भारत हर साल 130 अरब डॉलर से ज्यादा का तेल रूस से आयात कर रहा है।
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पहले भी कोर्ट ने टैरिफ को बताया असंवैधानिक
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की टैरिफ नीतियों को अदालत ने खारिज किया हो। इससे पहले न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड और वॉशिंगटन की एक अन्य अदालत भी IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ को असंवैधानिक बता चुकी हैं। अब तक कम से कम 8 मुकदमे ट्रंप की टैरिफ नीतियों को चुनौती दे चुके हैं, जिनमें कैलिफोर्निया राज्य भी शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजरें
ट्रंप ने साफ कहा है कि वह इस फैसले को मानने वाले नहीं हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। अदालत ने भी 14 अक्टूबर तक टैरिफ को बरकरार रखने की अनुमति दे दी है, जिससे ट्रंप प्रशासन को समय मिल गया है। अब देखना यह होगा कि अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय इस मसले पर क्या फैसला देता है।
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