ट्रंप के हटने का करेंगे इंतजार... ट्रेड डील पर अमेरिकी विदेश मंत्री से बोले थे NSA अजीत डोभाल

भारत और अमेरिका के बीच 2026 की ट्रेड डील पर सहमति बन गई है। अजीत डोभाल की रणनीति और मोदी सरकार के कड़े रुख ने ट्रंप प्रशासन के दबाव को नाकाम किया। डील में टैरिफ घटे, लेकिन भारत ने कृषि और डेयरी सेक्
ट्रंप के हटने का करेंगे इंतजार... ट्रेड डील पर अमेरिकी विदेश मंत्री से बोले थे NSA अजीत डोभाल
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

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    NSA अजीत डोभाल की कड़ी रणनीति

    रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 की शुरुआत में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से व्यक्तिगत बैठक की। इस बैठक में डोभाल ने साफ कहा कि, भारत किसी भी तरह की 'बुलिंग' स्वीकार नहीं करेगा और अगर ट्रंप प्रशासन सख्त रुख अपनाता है, तो भारत 2029 तक भी ट्रेड डील के लिए इंतजार कर सकता है।

    डोभाल ने यह भी कहा कि, ट्रंप और उनके सहयोगी सार्वजनिक रूप से भारत की आलोचना बंद करें। उनका यह कदम दोनों देशों के बीच रिश्तों को सुधारने और बातचीत को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी।

    क्यों बिगड़े रिश्ते

    भारत और अमेरिका के रिश्ते मई 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान तनावपूर्ण हो गए। ट्रंप ने दावा किया कि, उन्होंने सीजफायर के लिए मध्यस्थता की, जिसे भारत ने खारिज कर दिया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने पीएम मोदी पर व्यक्तिगत हमले किए और भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण यूक्रेन युद्ध में मदद का आरोप लगाया।

    इस समय अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगातार उच्च टैरिफ लगाया। अप्रैल 2025 में 10% बेसलाइन टैरिफ शुरू हुआ, जो जुलाई तक 25% तक बढ़ गया। अगस्त 2025 में रूस से तेल खरीद के कारण अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया गया, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया। इन टैरिफों और बयानबाजी ने दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ा दिया।

    रिश्ते सुधारने की कोशिशें

    ट्रंप प्रशासन के कठोर रवैए के बीच भारत ने सितंबर 2025 में रिश्ते सुधारने के लिए कई कदम उठाए। पीएम मोदी ने चीन दौरे के दौरान रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। इसके कुछ ही दिनों बाद अजीत डोभाल को अमेरिका भेजा गया, जहां उन्होंने ट्रंप प्रशासन के साथ ट्रेड डील और रिश्तों को सुधारने पर बातचीत की।

    डोभाल की बातचीत के कुछ ही दिनों बाद ट्रंप ने नरम लहजा अपनाया और पीएम मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन कर बधाई दी। इसके बाद साल के अंत तक दोनों नेताओं के बीच कई फोन कॉल हुईं। इसी दौरान व्यापार समझौते की दिशा में भी बातचीत बढ़ी।

    टैरिफ में कटौती और डील का विवरण

    2 फरवरी 2026 को ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर घोषणा करते हुए बताया कि, भारत-अमेरिका ट्रेड डील फाइनल हो गई। इसके तहत-

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    भारत ने इस डील में अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को 'रेड लाइन' बनाए रखा। केंद्र सरकार ने डील की पुष्टि करते हुए कहा कि बातचीत को अंतिम रूप दे दिया गया है, लेकिन लिखित समझौते का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    भारत-अमेरिका टैरिफ टाइमलाइन

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    भारत का रुख और रणनीतिक संतुलन

    रिपोर्ट बताती है कि, भारत अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को लंबे समय के लिए मजबूत देखता है। चीन से मुकाबले और 2047 तक देश को विकसित बनाने के लिए अमेरिका की तकनीक, निवेश और सैन्य सहयोग अहम हैं। हालांकि, भारत पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर नहीं है। इस कारण भारत ने रूस के साथ संबंध बनाए रखे हैं और यूरोप, ब्रिटेन तथा अन्य देशों के साथ भी आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते मजबूत किए हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि, भारत और अमेरिका के बीच बड़े कारण आज भी मजबूत हैं। भारत के निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा अमेरिका जाता है और अमेरिकी कंपनियां भारत में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं।

    अमेरिकी राजदूत के साथ बैठक

    नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बैठक से भी रिश्तों में सुधार हुआ। रक्षा, व्यापार और खनिज जैसे मुद्दों पर खुली बातचीत ने पिछले छह महीनों की तल्खी को कम किया। डील के ऐलान के बाद अधिकारियों का कहना है कि, यह संकेत देता है कि मोदी सरकार ने समझौते में दबाव में नहीं आकर देश की सुरक्षा और हितों को प्राथमिकता दी।

    भारत-अमेरिका संबंध

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील केवल आर्थिक समझौता नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक संतुलन का प्रतीक है। रिपोर्ट बताती है कि भारत ने किसी भी दबाव में नहीं झुककर कड़ा रुख अपनाया। डील में टैरिफ कटौती हुई, लेकिन भारत ने अपनी 'रेड लाइन' बनाए रखी।

    आने वाले समय में यह डील दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता लाने और भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वहीं अमेरिका के लिए भी यह डील 2026 के मध्यावधि चुनाव में बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

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    By Anshay ji

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