आरबीआई गवर्नर बोले- महंगाई के खिलाफ लड़ाई एक सीमा तक जीत ली, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ यह युद्ध Photo of Wasif Wasif Send an email2 days ago

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश ने मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई में काफी हद तक सफलता प्राप्त कर ली है, लेकिन यह युद्ध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल्य स्थिरता अब भी आरबीआई की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
खुदरा महंगाई पर नियंत्रण, खाद्य-ऊर्जा कीमतों में चुनौती बरकरार
गवर्नर का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश की खुदरा महंगाई दर नियंत्रित दायरे में है, लेकिन खाद्य वस्तुओं और ऊर्जा कीमतों में वैश्विक अस्थिरता के चलते चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। उन्होंने यह संकेत दिया कि आरबीआई मौद्रिक नीति को सतर्क और संतुलित बनाए रखेगा ताकि भविष्य में महंगाई दोबारा सिर न उठा सके। उन्होंने कहा कि बीते दो सालों में आरबीआई ने ब्याज दरें बढ़ाकर मुद्रास्फीति को नियंत्रण में लाने का काम किया और इस रणनीति ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं।
मूल्य स्थिरता नागरिकों का जीवन स्तर सुरक्षित रखने में सहायक
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैश्विक परिस्थितियां, मौसम के प्रभाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी कई वजहें अब भी जोखिम पैदा करते हैं। इसलिए, आरबीआई अपनी सतर्क निगरानी बनाए रखेगा और जरूरत पड़ी तो समय रहते कदम उठाएगा। गवर्नर ने यह भी कहा कि मूल्य स्थिरता केवल आर्थिक विकास के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन स्तर को सुरक्षित रखने के लिए भी आवश्यक है।
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आर्थिक स्थिरता के लिए सतर्कता जरूरी
केंद्रीय बैंक का यह रुख देश की आर्थिक स्थिरता और विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी वैश्विक अनिश्चितताओं से पूरी तरह मुक्त नहीं हुई है, इसलिए यह जरूरी है कि नीति निर्माताओं और रिजर्व बैंक के बीच समन्वय बना रहे। उनका मानना है कि भले ही मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई फिलहाल जीती गई हो, लेकिन व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए यह युद्ध आगे भी जारी रहने वाला है।

















