राजा रघुवंशी हत्याकांड : शिलांग कोर्ट ने सोनम और राज कुशवाह की जमानत याचिका की खारिज

राजा रघुवंशी हत्याकांड : शिलांग कोर्ट ने सोनम और राज कुशवाह की जमानत याचिका की खारिज
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    शादी के 11 दिन बाद हत्या की साजिश

    11 मई को सहकार नगर निवासी राजा रघुवंशी की शादी गोविंद नगर खारचा की रहने वाली सोनम से हुई थी। लेकिन यह वैवाहिक जीवन महज 11 दिनों तक ही चल पाया। पुलिस जांच में सामने आया कि सोनम शादी के तुरंत बाद राजा को हनीमून के बहाने शिलांग ले गई और वहां अपने प्रेमी राज कुशवाह और अन्य साथियों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी।

    पुलिस के मुताबिक यह हत्या एक पूर्व नियोजित साजिश थी, जिसके पीछे लंबे समय से योजना बन रही थी। इस हत्याकांड ने इंदौर और शिलांग पुलिस को भी जोड़ दिया, क्योंकि वारदात शिलांग में हुई, लेकिन साजिश और सबूतों को मिटाने की कोशिश इंदौर में की गई।

    इंदौर में छिपी थी सोनम, सबूत फेंके गए

    हत्या के बाद सोनम फरार होकर इंदौर आ गई थी और देवास नाका स्थित एक फ्लैट में छिप गई। यह फ्लैट ब्रोकर शिलोम जेम्स के माध्यम से किराए पर लिया गया था। पुलिस ने जब मामले की तहकीकात की, तो सामने आया कि सोनम के फरार होने के बाद शिलोम जेम्स, फ्लैट मालिक लोकेन्द्र सिंह तोमर और सिक्योरिटी गार्ड बलवीर ने मिलकर सोनम के बैग, पिस्टल और जेवरात को पलासिया स्थित एक नाले में फेंक दिया था। हालांकि सबूत मिटाने के इस मामले में गिरफ्तार इन तीनों आरोपियों को बाद में अदालत से जमानत मिल गई है।

    मुख्य आरोपी जेल में

    इस केस से जुड़े तीन अन्य आरोपी जो हत्या के बाद सोनम को पनाह देने और सबूत नष्ट करने में शामिल थे, उन्हें गिरफ्तार करने के बाद अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया है। लेकिन मुख्य आरोपी सोनम और राज कुशवाह को राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

    परिवार मांग रहा कड़ी सजा

    राजा रघुवंशी के परिजनों का कहना है कि यह हत्या बेहद शातिराना और योजनाबद्ध थी, इसलिए मुख्य आरोपियों को किसी भी हाल में जमानत न मिले और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। परिवार की मांग है कि मामले में तेजी से चार्जशीट दाखिल की जाए और सुनवाई जल्द शुरू हो।

    अगली सुनवाई चालान दाखिल होने के बाद

    जानकारी के मुताबिक शिलांग पुलिस ने अब तक इस केस का चालान कोर्ट में पेश नहीं किया है। उम्मीद की जा रही है कि 15 अगस्त के बाद चालान दाखिल किया जाएगा, जिसके बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी।

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