new feature is created by anshay MP Weather Update :Peoples Update Special : 'लेडी रोसेटा'....यह आलू जमीन के अंदर नहीं हवा में पैदा होता है, मप्र के किसानों को मिल सकेंगे बीज

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बनते हैं अच्छी क्वालिटी के चिप्स
लेडी रोसेटा आलू के अच्छी क्वालिटी के चिप्स तैयार होते हैं। यही वजह है कि चिप्स कंपनियां खेत में ही किसान से सौदा कर लेती हैं। आलू में शुगर कम चिप्स तलने के बाद काले और लाल नहीं पड़ते हैं।
आलू की खासियतें
- इस किस्म में आलू सिस्ट नेमाटोड के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता होती है और यह स्प्लिटिंग रोग के प्रति प्रतिरोधी है,
- यह किस्म उच्च उपज देती है और इसे जल्दी पकने वाली किस्म है।
- इसके कंद एक समान, गोल और मध्यम आकार के होते हैं, जो मशीनों से प्रोसेसिंग के बेहतर हैं।
- इस तरह की किस्म के आलू का उत्पादन भूटान, रवांडा, थाईलैंड, भारत, स्पेन समेत दक्षिण अमेरिका और भारत के कुछ हिस्से में होता है।
टिश्यू कल्चर से पौधे तैयार होते हैं
एरोपोनिक्स तकनीक से आलू तैयार करने में मिट्टी का उपयोग नहीं किया जाता है, बल्कि सबसे पहले टिश्यू कल्चर और बायो-टेक्नोलॉजी की मदद से आलू के पौधों को नर्सरी में तैयार किया जाता है। एक महीने के अंदर जड़ और पत्ते निकल आते हैं। इसके बाद इन्हें जार से निकालकर थमार्कोल की शीट में छेद करके इस तरह से लगाया जाता है कि जड नीचे और पत्ते ऊपर रहते हैं। पौधों की जड़ों पर पोषक तत्वों और पानी की धुंध (स्प्रे) की जाती है, जिससे उन्हें आवश्यक पोषक तत्व मिलते है। इस तकनीक से तैयार आलू के बीज रोग-मुक्त होते हैं और उनमें किसी प्रकार के फंगल संक्रमण का खतरा नहीं होता है।
एक एकड़ में 238 किलो का उत्पादन होगा
विवि के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया कि एक एकड़ में सादा आलू की खेती के लिए 8 से 10 क्विंटल आलू की जरूरत पड़ती है और 100 क्विंटल पैदावार होती है जबकि एरोपोनिक्स तकनीक से तैयार आलू सिर्फ 1.20 क्विंटल लगेगा और 238 क्विंटल उत्पादन होगा। एरोपोनिक्स आलू भी सामान्य आलू की तरह से दो से ढाई महीने में तैयार हो जाता है।
शुगर कम होने से आलू काले और लाल नहीं पड़ते
लेडी रोसेटा आलू की चिप्स कंपनियों में काफी डिमांड है, क्योंकि शुगर कम होने से आलू काले और लाल नहीं पड़ते। आलू के बीज विवि में तैयार किए जा रहे हैं, जो दो से तीन साल में प्रदेश के किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

















