भोपाल के हमीदिया अस्पताल में प्रदेश का पहला ABOi किडनी ट्रांसप्लांट, O ग्रुप के मरीज को B ग्रुप की किडनी लगाई गई

भोपाल। राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) स्थित हमीदिया अस्पताल में मध्यप्रदेश का पहला ऐसा किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया है, जिसमें मरीज और डोनर का ब्लड ग्रुप मेल नहीं खाता था। यह ट्रांसप्लांट आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क किया गया, जिससे निजी अस्पतालों में लाखों खर्च करने से मरीज बच गया।
बेमेल ब्लड ग्रुप के बावजूद सफल ट्रांसप्लांट
हमीदिया अस्पताल में 43 वर्षीय मरीज (बदला हुआ नाम: मनुज कुमार) को उनकी पत्नी (बदला हुआ नाम: कमला) की किडनी ट्रांसप्लांट की गई, जबकि दोनों का ब्लड ग्रुप अलग था। मरीज का O और डोनर का B। आमतौर पर ऐसे मामलों में अंग अस्वीकार होने का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन GMC की ट्रांसप्लांट टीम ने चुनौती को स्वीकार कर सफलतापूर्वक सर्जरी कर दिखाई।
15 दिन की मेडिकल तैयारी, फिर किया ट्रांसप्लांट
मरीज के शरीर को नई किडनी स्वीकारने लायक बनाने के लिए एंटीबॉडी को नियंत्रित करने वाली खास दवाओं का इस्तेमाल किया गया। 15 दिन की तैयारी के बाद जब 29 जुलाई की शाम तक शरीर में एंटीबॉडी का स्तर सुरक्षित सीमा में पहुंच गया, तो डॉक्टरों ने 30 जुलाई को सर्जरी की।
लैप्रोस्कोपिक तकनीक से निकाली गई किडनी
इस प्रक्रिया में डोनर की किडनी को लैप्रोस्कोपिक तकनीक से निकाला गया, जिससे ऑपरेशन में कम दर्द होता है और रिकवरी जल्दी होती है। सुबह 9 बजे शुरू हुई सर्जरी दोपहर 2 बजे तक चली।
निजी अस्पतालों में 15 लाख तक खर्च
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GMC में अब तक 10 ट्रांसप्लांट, लेकिन यह सबसे खास
GMC में अब तक कुल 10 किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं, लेकिन यह पहला अवसर था जब ब्लड ग्रुप असंगत मरीज को किडनी दी गई। इससे सरकारी मेडिकल सिस्टम में भरोसा और बढ़ा है।
ट्रांसप्लांट टीम के प्रमुख विशेषज्ञ
- किडनी रोग विशेषज्ञ: डॉ. हिमांशु शर्मा, डॉ. आर.आर. बर्डे।
- प्रत्यारोपण सर्जन: डॉ. सौरभ जैन, डॉ. अमित जैन, डॉ. समीर व्यास, डॉ. नरेंद्र कुर्मी।
- निश्चेतना विशेषज्ञ: डॉ. आर.पी. कौशल, डॉ. बृजेश कौशल, डॉ. श्वेता श्रीवास्तव, डॉ. उर्मिला केसरी, डॉ. असीम।
- जूनियर डॉक्टर टीम: डॉ. सौरभ, डॉ. अजय, डॉ. स्कंद, डॉ. अभिषेक, डॉ. शुभम, डॉ. शिवासमय, डॉ. दीपक, डॉ. पायल, डॉ. रीनू, डॉ. सुष्मिता, डॉ. राशिका, डॉ. श्रावणी शामिल रहीं।

















