भारत ने रूस पर निर्भरता घटाने के लिए अमेरिका से ईरान और वेनेज़ुएला का तेल खरीदने की मांगी अनुमति

भारत ने रूस पर निर्भरता घटाने के लिए अमेरिका से ईरान और वेनेज़ुएला का तेल खरीदने की मांगी अनुमति

αñ¿αÑìαñ»αÑéαñ»αñ╛αñ░αÑìαñò/αñ¿αñê αñªαñ┐αñ▓αÑìαñ▓αÑÇαÑñ αñ¡αñ╛αñ░αññ αñ¿αÑç αñÅαñò αñ¼αñ╛αñ░ αñ½αñ┐αñ░ αñàαñ«αÑçαñ░αñ┐αñòαñ╛ αñ╕αÑç αñåαñùαÑìαñ░αñ╣ αñòαñ┐αñ»αñ╛ αñ╣αÑê αñòαñ┐ αñ»αñªαñ┐ αñ╡αñ╣ αñ░αÑéαñ╕ αñ╕αÑç αññαÑçαñ▓ αñåαñ»αñ╛αññ αñ«αÑçαñé αñëαñ▓αÑìαñ▓αÑçαñûαñ¿αÑÇαñ» αñòαñƒαÑîαññαÑÇ αñòαñ░αññαñ╛ αñ╣αÑê, αññαÑï αñëαñ╕αÑç αñ¬αÑìαñ░αññαñ┐αñ¼αñéαñºαñ┐αññ αñªαÑçαñ╢αÑïαñé αñêαñ░αñ╛αñ¿ αñöαñ░ αñ╡αÑçαñ¿αÑçαñ£αñ╝αÑüαñÅαñ▓αñ╛ αñ╕αÑç αñòαñÜαÑìαñÜαñ╛ αññαÑçαñ▓ αñûαñ░αÑÇαñªαñ¿αÑç αñòαÑÇ αñàαñ¿αÑüαñ«αññαñ┐ αñªαÑÇ αñ£αñ╛αñÅαÑñ αñ¡αñ╛αñ░αññ αñòαñ╛ αññαñ░αÑìαñò αñ╣αÑê αñòαñ┐ αñ»αñªαñ┐ αñÅαñò αñ╕αñ╛αñÑ αñ░αÑéαñ╕, αñêαñ░αñ╛αñ¿ αñöαñ░ αñ╡αÑçαñ¿αÑçαñ£αñ╝αÑüαñÅαñ▓αñ╛ αññαÑÇαñ¿αÑïαñé αñ¼αñíαñ╝αÑç αññαÑçαñ▓ αñëαññαÑìαñ¬αñ╛αñªαñò αñªαÑçαñ╢αÑïαñé αñòαÑÇ αñåαñ¬αÑéαñ░αÑìαññαñ┐ αñ¼αñéαñª αñòαñ░ αñªαÑÇ αñ£αñ╛αññαÑÇ αñ╣αÑê, αññαÑï αñçαñ╕αñ╕αÑç αñàαñéαññαñ░αñ░αñ╛αñ╖αÑìαñƒαÑìαñ░αÑÇαñ» αñ¼αñ╛αñ£αñ╛αñ░ αñ«αÑçαñé αññαÑçαñ▓ αñòαÑÇ αñòαÑÇαñ«αññαÑçαñé αññαÑçαñ£αÑÇ αñ╕αÑç αñ¼αñóαñ╝ αñ£αñ╛αñÅαñéαñùαÑÇ αñöαñ░ αñ╡αÑêαñ╢αÑìαñ╡αñ┐αñò αñàαñ░αÑìαñÑαñ╡αÑìαñ»αñ╡αñ╕αÑìαñÑαñ╛ αñ¬αñ░ αñªαñ¼αñ╛αñ╡ αñ¼αñ¿αÑçαñùαñ╛αÑñ αñ¡αñ╛αñ░αññαÑÇαñ» αñ¬αÑìαñ░αññαñ┐αñ¿αñ┐αñºαñ┐αñ«αñéαñíαñ▓ αñ¿αÑç αñàαñ«αÑçαñ░αñ┐αñòαÑÇ αñàαñºαñ┐αñòαñ╛αñ░αñ┐αñ»αÑïαñé αñ╕αÑç αñ«αÑüαñ▓αñ╛αñòαñ╛αññ αñ«αÑçαñé αñ»αñ╣ αñ¼αñ╛αññ αñ░αñûαÑÇαÑñ αñ¡αñ╛αñ░αññαÑÇαñ» αñàαñºαñ┐αñòαñ╛αñ░αñ┐αñ»αÑïαñé αñ¿αÑç αñªαÑïαñ╣αñ░αñ╛αñ»αñ╛ αñòαñ┐ αñ¡αñ╛αñ░αññ αñàαñ¬αñ¿αÑÇ αñèαñ░αÑìαñ£αñ╛ αñ╕αÑüαñ░αñòαÑìαñ╖αñ╛ αñòαÑç αñ▓αñ┐αñÅ αñ╡αñ┐αñ╡αñ┐αñº αñ╕αÑìαñ░αÑïαññ αñÜαñ╛αñ╣αññαñ╛ αñ╣αÑêαÑñ αñ¡αñ╛αñ░αññ αñòαÑï αñ░αÑéαñ╕ αñ╕αÑç αñåαñ»αñ╛αññ αñÿαñƒαñ╛αñ¿αÑç αñòαÑÇ αñ╢αñ░αÑìαññ αñòαÑçαñ╡αñ▓ αññαñ¡αÑÇ αñ╕αÑìαñ╡αÑÇαñòαñ╛αñ░αÑìαñ» αñ╣αÑïαñùαÑÇ, αñ£αñ¼ αñ╡αÑêαñòαñ▓αÑìαñ¬αñ┐αñò αñ╕αñ╕αÑìαññαÑç αñ╕αÑìαñ░αÑïαññαÑïαñé αñ╕αÑç αñûαñ░αÑÇαñª αñòαÑÇ αñàαñ¿αÑüαñ«αññαñ┐ αñªαÑÇ αñ£αñ╛αñÅαÑñ αñàαñ«αÑçαñ░αñ┐αñòαÑÇ αñªαÑéαññαñ╛αñ╡αñ╛αñ╕ αñòαÑç αñ¬αÑìαñ░αñ╡αñòαÑìαññαñ╛ αñ¿αÑç αñçαñ╕ αñ¬αñ░ αñ╕αÑÇαñºαÑÇ αñƒαñ┐αñ¬αÑìαñ¬αñúαÑÇ αñòαñ░αñ¿αÑç αñ╕αÑç αñçαñ¿αñòαñ╛αñ░ αñòαñ░αññαÑç αñ╣αÑüαñÅ αñòαñ╣αñ╛ αñòαñ┐ αñ¡αñ╛αñ░αññ αñòαñ╛ αñ░αÑéαñ╕ αñ╕αÑç αññαÑçαñ▓ αñòαÑÇ αñûαñ░αÑÇαñª αñàαñ«αÑçαñ░αñ┐αñòαñ╛ αñòαÑç αñ░αÑéαñ╕ αñ¬αñ░ αñ╡αñ┐αññαÑìαññαÑÇαñ» αñªαñ¼αñ╛αñ╡ αñ¼αñ¿αñ╛αñ¿αÑç αñòαÑç αñ¬αÑìαñ░αñ»αñ╛αñ╕αÑïαñé αñòαÑï αñòαñ«αñ£αÑïαñ░ αñòαñ░αññαñ╛ αñ╣αÑêαÑñ αñ╡αñ╛αñúαñ┐αñ£αÑìαñ» αñöαñ░ αñëαñªαÑìαñ»αÑïαñù αñ«αñéαññαÑìαñ░αÑÇ αñ¬αÑÇαñ»αÑéαñ╖ αñùαÑïαñ»αñ▓ αñòαÑç αñ¿αÑçαññαÑâαññαÑìαñ╡ αñ«αÑçαñé  αñ╕αÑïαñ«αñ╡αñ╛αñ░ αñòαÑï αñàαñ«αÑçαñ░αñ┐αñòαñ╛ αñùαñ»αñ╛ αñ¡αñ╛αñ░αññαÑÇαñ» αñ¬αÑìαñ░αññαñ┐αñ¿αñ┐αñºαñ┐αñ«αñéαñíαñ▓ αñ╡αñ╛αñ¬αñ╕ αñ▓αÑîαñƒ αñåαñ»αñ╛ αñ╣αÑêαÑñ 

रूसी तेल की खरीद भारत के लिए लाभ का सौदा

दरअसल, रूस पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद उसने अपने कच्चे तेल की खरीद पर छूट दी थी। इसी कारण भारत जैसे देशों के लिए यह सौदा आकर्षक साबित हुआ। इसी आकर्षण में भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी। इससे उसकी आयात लागत काफी कम हुई। आंकड़े बताते हैं कि जुलाई में भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चा तेल औसतन 68.90 डॉलर प्रति बैरल में खरीदा, जबकि सऊदी अरब से यही कीमत 77.50 डॉलर और अमेरिका से 74.20 डॉलर रही। इस सस्ते रूसी तेल ने भारत के आयात बिल को काफी हद तक नियंत्रित किया है। लेकिन अमेरिका चाहता है कि भारत रूस पर अपनी निर्भरता घटा कर उसके खिलाफ दबाव बढ़ाए। भारत की 90% कच्चे तेल की आवश्यकता आयात से पूरी होती है। ऐसे में सस्ते स्रोतों तक पहुंच सीमित करना सीधे-सीधे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर असर डालता है।

भारत एकतरफा दबाव के आने के मूड में नहीं

यही कारण है कि भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में कहा कि आने वाले समय में भारत अपने ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को प्राप्त करने में अमेरिकी तेल और गैस की बड़ी भूमिका चाहता है। इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि भारत अमेरिका से सहयोग चाहता है लेकिन एकतरफा दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। ईरान और वेनेज़ुएला से तेल खरीदना भारत के लिए नया नहीं है। भारत ने 2019 तक ईरान से नियमित रूप से कच्चा तेल खरीदा, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आयात रोकना पड़ा। इसी तरह रिलायंस इंडस्ट्रीज ने हाल ही में वेनेज़ुएला से आयात बंद कर दिया, क्योंकि अमेरिका ने प्रतिबंध और कड़े कर दिए हैं। यदि अब अमेरिका इस दिशा में छूट देता है तो भारत फिर से इन स्रोतों का लाभ उठा सकता है और अपनी लागत को नियंत्रित कर सकता है।

खाड़ी देशों या अमेरिका से तेल खरीदना महंगा

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के दबाव में यदि भारत रूस से आयात घटा देता है और साथ ही ईरान-वेनेज़ुएला का रास्ता बंद रहता है, तो उसे खाड़ी देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ेगा। इससे न सिर्फ आयात बिल बढ़ेगा बल्कि घरेलू ईंधन की कीमतों में भी उछाल आ सकता है। ऐसे में भारत की मांग वस्तुतः संतुलन बनाने का प्रयास है। एक ओर वह अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग बनाए रखना चाहता है, तो दूसरी ओर अपनी ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती आपूर्ति को भी सुनिश्चित करना चाहता है। तेल बाजार की स्थिति भी आने वाले समय में चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ओपेक प्लस और अन्य उत्पादक देशों के उत्पादन बढ़ाने की संभावना है, जिससे अगले साल तेल की अधिक आपूर्ति हो सकती है और कीमतों पर दबाव बन सकता है। हालांकि, अगर रूस, ईरान और वेनेज़ुएला जैसे बड़े उत्पादकों से आपूर्ति पर एक साथ रोक लगती है, तो कीमतों के तेजी से चढ़ने का खतरा भी उतना ही बढ़ जाएगा।

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपु...

Latest Posts