बजाज फाइनेंस के शेयरों में इस साल अब तक 30% से अधिक तेजी, क्या आगे जारी रहेगा यह सिलसिला?

मुंबई। बजाज फाइनेंस के शेयरों ने 2025 में अब तक 30% से अधिक की बढ़त दर्ज की है। निवेशकों की नजर इस पर है कि क्या यह स्टॉक ₹1,000 का स्तर पार कर पाएगा। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं पहला, उपभोक्ता वस्तुओं पर संभावित जीएसटी कटौती और दूसरा, भारत की क्रेडिट रेटिंग में लगभग दो दशक बाद हुआ सुधार। इन दोनों वजहों के चलते कंपनी को न केवल सस्ते ऋण की सुविधा मिलेगी बल्कि ईएमआई घटने से उपभोक्ता मांग भी तेज होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान कायम रहा तो बजाज फाइनेंस का शेयर नई ऊंचाई को छू सकता है। सबसे अहम पहलू है कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर जीएसटी में कमी। प्रस्तावित जीएसटी सुधार में सरकार छोटे वाहनों पर जीएसटी दर को 28% से घटाकर 18% करने का प्रस्ताव है। साथ ही बीमा प्रीमियम पर जीएसटी की दर 5% या फिर शून्य तक ले आती है, तो इससे आम उपभोक्ता की जेब पर बोझ बहुत घट जाएगा। नतीजतन, ईएमआई भी सस्ती होगी और मांग बढ़ेगी। बाजाज फाइनेंस जैसे एनबीएफसी को इससे सीधा फायदा होगा, क्योंकि इस कंपनी का बड़ा मुनाफा उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की फाइनेंसिंग से आता है। अधिक मांग का मतलब है अधिक ऋण वितरण और उससे लाभ में बढ़ोतरी।
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घट सकती है ऑफशोर बॉरोइंग की लागत
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सस्ते विदेशी कर्ज से मजबूत होगी कंपनी की स्थिति
कुछ विश्लेषक इसे धीरे-धीरे खरीदने की रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं, ताकि लंबी अवधि में अच्छे रिटर्न हासिल किए जा सकें। फंडामेंटल्स भी बहुत अच्छे हैं। जीएसटी कटौती से उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती होंगी और उनकी मांग बढ़ेगी, जिससे ऋण वितरण की गति और पोर्टफोलियो का आकार बड़ा होगा। वहीं विदेशों से सस्ते कर्ज मिलने पर कंपनी की मार्जिन स्थिति मजबूत होगी और लाभप्रदता सुधरेगी। इसके अलावा, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के साथ-साथ आवास ऋण और असुरक्षित खुदरा ऋणों में भी सुधार की संभावना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 तक बाजाज फाइनेंस की कमाई पर इन सुधारों का ठोस असर दिखेगा। खासकर यदि सरकार ज्यादातर वस्तुओं और सेवाओं को 5% और 18% जीएसटी स्लैब में ले आती है, तो मांग में व्यापक बढ़ोतरी होगी। वित्तीय बाज़ार में यह उम्मीद भी बढ़ी है कि दिवाली तक सरकार नए जीएसटी सुधारों की घोषणा करेगी, जिससे उपभोक्ता मांग और कंपनियों की आय दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। एक तरफ घरेलू सुधार और दूसरी तरफ वैश्विक स्तर पर भारत की बेहतर छवि। यदि कंपनी के शेयर सपोर्ट स्तरों पर टिके रहते हुए रेजिस्टेंस को पार कर लेती है, तो यह स्टॉक न ₹1,050 तक पहुंच सकता है। आने वाले महीनों में जीएसटी सुधारों और विदेशी पूंजी की लागत पर निर्भर करेगा कि यह शेयर निवेशकों को कितनी ऊँचाई तक लाभ दिला पाता है।

















