अलास्का शिखर बैठक को लेकर यूक्रेनी सैनिक बहुत उत्साहित नहीं, बोले युद्ध-विराम के लिए पुतिन का राजी होना कठिन

कीव। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन के बीच अलास्का में आज शिखर बैठक होने वाली है। इस शिखर बैठक को लेकर यूक्रेन की पू्र्वी सीमा पर ड्रोन गिराने का प्रशिक्षण ले रहे यूक्रेनी सैनिकों में कोई उत्साह नहीं हैं। उनका मानना है रूस ने हाल के दिनों में जिस तरह यूक्रेन पर हमले तेज किए हैं, उसे देखते हुए इस बात की संभावना लगभग नहीं के बराबर है कि डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक में रूसी राष्ट्रपति युद्धविराम के लिए राजी हो जाएंगे। ड्रोन गिराने का प्रशिक्षण ले रहे यूक्रेनी सैनिकों ने कहा हमारे पास युद्ध के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है। शांति की संभावना नहीं के बराबर दिखाई देती है। उन्होंने कहा, हमें किसी भी स्थिति में रूस से संघर्ष जारी रखना होगा। केंद्र के प्रशिक्षक इहोर ने कहा यह सच है कि हमारे पास हथियार कम हैं, हमारे हथियार भी तेजी से घट रहे हैं, लेकिन युद्ध हथियारों से नहीं, अंततः मनोबल से लड़े जाते हैं। हम रूसी सैनिकों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। चूेंकि, यूक्रेन-रूस युद्ध में ड्रोन प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रहा है, इसलिए इस केंद्र में यूक्रेनी सैनिकों को ड्रोन गिराने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
जमीन के बदले शांति जैसी शर्तें मानना कठिन
2014 αñ╕αÑç αñ╕αÑçαñ¿αñ╛ αñ«αÑçαñé αñ╕αÑçαñ╡αñ╛αñÅαñé αñªαÑç αñ░αñ╣αÑç αñçαñ╣αÑïαñ░ αñ¼αññαñ╛αññαÑç αñ╣αÑêαñé αñòαñ┐ αñåαñºαÑüαñ¿αñ┐αñò αñ»αÑüαñªαÑìαñº αñ«αÑçαñé αñ╢αñ╛αñƒαñùαñ¿ αñÅαñò αñ¼αÑçαñ╣αñª αñ╕αñ╛αñ«αñ╛αñ¿αÑìαñ» αñ╣αñÑαñ┐αñ»αñ╛αñ░ αñ╣αÑê, αñ▓αÑçαñòαñ┐αñ¿ αñ¿αñ£αñªαÑÇαñò αñ╕αÑç αñíαÑìαñ░αÑïαñ¿ αñùαñ┐αñ░αñ╛αñ¿αÑç αñ«αÑçαñé αñçαñ╕αñòαñ╛ αñòαÑïαñê αñ£αñ╡αñ╛αñ¼ αñ¿αñ╣αÑÇαñé αñ╣αÑêαÑñ αñëαñ¿αÑìαñ╣αÑïαñéαñ¿αÑç αñòαñ╣αñ╛ αñ»αÑüαñªαÑìαñº αñ╣αñ«αñ╛αñ░αÑÇ αñ¿αñ┐αñ»αññαñ┐ αñ¼αñ¿ αñùαñ»αñ╛ αñ╣αÑêαÑñ αñ»αÑéαñòαÑìαñ░αÑçαñ¿ αñòαÑç αñ▓αñ┐αñÅ αñ£αñ«αÑÇαñ¿ αñòαÑç αñ¼αñªαñ▓αÑç αñ╢αñ╛αñéαññαñ┐ αñ£αÑêαñ╕αÑÇ αñ╢αñ░αÑìαññαÑçαñé αñ«αñ╛αñ¿αñ¿αñ╛ αñòαñáαñ┐αñ¿ αñ╣αÑêαÑñ αñçαñ╕αñ▓αñ┐αñÅ αñ«αÑêαñé αñöαñ░ αñ«αÑçαñ░αÑç αñ╕αñ╛αñÑαÑÇ αñàαñ¬αñ¿αÑç αñçαñ▓αñ╛αñòαÑïαñé αñòαÑÇ αñ¬αÑéαñ░αÑìαñú αñåαñ£αñ╛αñªαÑÇ αññαñò αñ▓αñíαñ╝αñ¿αñ╛ αñ£αñ╛αñ░αÑÇ αñ░αñûαÑçαñéαñùαÑçαÑñ αñ»αñ╣αñ╛αñé αñ╕αÑêαñ¿αñ┐αñòαÑïαñé αñòαÑï αñíαÑìαñ░αÑïαñ¿ αñùαñ┐αñ░αñ╛αñ¿αÑç αñòαñ╛ αñ¬αÑìαñ░αñ╢αñ┐αñòαÑìαñ╖αñú αñªαñ┐αñ»αñ╛ αñ£αñ╛αññαñ╛ αñ╣αÑêαÑñ αñçαñ╕ αñòαÑçαñéαñªαÑìαñ░ αñ«αÑçαñé αñ╕αÑêαñ¿αñ┐αñò αññαÑçαñ£αÑÇ αñ╕αÑç αñëαñíαñ╝αññαÑç αñ▓αñòαÑìαñ╖αÑìαñ»αÑïαñé αñ¬αñ░ αñ¿αñ┐αñ╢αñ╛αñ¿αñ╛ αñ╕αñ╛αñºαñ¿αÑç αñòαÑÇ αñ¬αÑìαñ░αÑêαñòαÑìαñƒαñ┐αñ╕ αñòαñ░αññαÑç αñ╣αÑêαñé, αñ¬αñ╣αñ▓αÑç αñ£αñ«αÑÇαñ¿ αñ╕αÑç αñöαñ░ αñ½αñ┐αñ░ αñÜαñ▓αññαÑç-αñÜαñ▓αññαÑç αñ»αñ╛ αñªαÑîαñíαñ╝αññαÑç αñ╣αÑüαñÅαÑñ αñçαñ╕αñòαÑç αñ¼αñ╛αñª αñçαñ¿αÑìαñ╣αÑçαñé αñ╕αÑÇαñ«αñ╛ αñ¬αñ░ αñ¡αÑçαñ£ αñªαñ┐αñ»αñ╛ αñ£αñ╛αññαñ╛ αñ╣αÑêαÑñ αñíαÑìαñ░αÑïαñ¿ αñÜαÑéαñéαñòαñ┐ αñåαñ£ αñòαÑÇ αñ▓αñíαñ╝αñ╛αñê αñòαñ╛ αñ╕αñ¼αñ╕αÑç αñ¼αñíαñ╝αñ╛ αñ╣αñÑαñ┐αñ»αñ╛αñ░ αñ¼αñ¿ αñùαñÅ αñ╣αÑêαñé, αñçαñ╕ αñ▓αñ┐αñÅ αñ»αñ╣αñ╛αñé αñ╕αÑêαñ¿αñ┐αñòαÑïαñé αñòαÑï αñçαñ¿αÑìαñ╣αÑçαñé αñùαñ┐αñ░αñ╛αñ¿αÑç αñòαñ╛ αñ¬αÑìαñ░αñ╢αñ┐αñòαÑìαñ╖αñú αñªαñ┐αñ»αñ╛ αñ£αñ╛ αñ░αñ╣αñ╛ αñ╣αÑêαÑñ αñ»αÑéαñòαÑìαñ░αÑçαñ¿ αñ«αÑçαñé αñ╕αÑêαñ¿αñ┐αñòαÑïαñé αñòαÑç αñ¼αÑÇαñÜ αñçαñ¿ αñªαñ┐αñ¿αÑïαñé αñÅαñò αñ¿αñ»αñ╛ αñ╢αñ¼αÑìαñª αñ¼αñ╣αÑüαññ αñçαñ╕αÑìαññαÑçαñ«αñ╛αñ▓ αñ╣αÑï αñ░αñ╣αñ╛ αñ╣αÑê–αñíαÑìαñ░αÑïαñ¿αÑïαñ╕αñ╛αñçαñíαÑñ αñçαñ╕αñòαñ╛ αñ«αññαñ▓αñ¼ αñ╣αÑê αñíαÑìαñ░αÑïαñ¿ αñ╕αÑç αñ╣αÑïαñ¿αÑç αñ╡αñ╛αñ▓αÑÇ αñ¡αñ╛αñ░αÑÇ αññαñ¼αñ╛αñ╣αÑÇ αñöαñ░ αñ«αÑîαññαÑçαñéαÑñ αñíαÑìαñ░αÑïαñ¿ αñåαñ£ αñòαÑÇ αñ▓αñíαñ╝αñ╛αñê αñ«αÑçαñé αñ╕αñ¼αñ╕αÑç αñ£αÑìαñ»αñ╛αñªαñ╛ αñçαñ╕αÑìαññαÑçαñ«αñ╛αñ▓ αñòαñ┐αñ»αñ╛ αñ£αñ╛αñ¿αÑç αñ╡αñ╛αñ▓αñ╛ αñ╣αñÑαñ┐αñ»αñ╛αñ░ αñ¼αñ¿ αñùαñ»αñ╛ αñ╣αÑêαÑñ
काफी घट चुकी है यूक्रेनी फ्रंटलाइन यूनिट्स की ताकत
उसके पास अब हथियार बहुत नहीं बचे हैं। रक्षा के साधन के रूप में उनके पास ड्रोन गिराने के लिए शॉटगन जैसे हथियार हैं। एक सच्चाई यह भी है कि कई यूक्रेनी फ्रंटलाइन यूनिट्स की ताकत अब काफी घट चुकी है। नई भर्ती की कोशिशें लगातार असफल रही हैं। यूक्रेनी सैनिक हथियारों और सैनिकों की संख्या के लिहाज से रूस से बहुत पीछे हैं। सैनिक लंबे समय से लड़ते-लड़ते थक चुके हैं और कई क्षेत्रों में उन्हें बड़ा भूभाग रूसी सैनिकों के हाथों गवांना पड़ा है। इसके बाद भी वे हार मानने और रूस के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। ओलेक्सीय नाम के सैनिक का मानना है कि युद्ध किसी न किसी तरह खत्म होना चाहिए। लेकिन रूस को जमीन देना कदापि ठीक नहीं है। ओलेक्सीय अपने पिता और कई दोस्तों को युद्ध में खो चुके हैं। वह बताते हैं, हाल के दिनों में दबाव बढ़ा है, रूस को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हर दिन करीब 1,000 सैनिक मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं, जिससे उनकी ताकत धीरे-धीरे घट रही है।
हमलों से ऊब चुके हैं लोग लेकिन सरेंडर को राजी नहीं
मोर्चे पर दिखने वाली यह स्थिति शहरों में भी झलकती है। नागरिक भी लगातार रूसी हमलों का सामना करते-करते ऊब चुके हैं। लगातार मौतें हो रही हैं। लोग जान गंवा रहे हैं या घायल हो रहे हैं। हर तरफ तबाही का मंंजर है। पिछले माह रूस ने यूक्रेन पर 6,000 से ज्यादा ड्रोन दागे थे, जबकि जुलाई 2024 में यह संख्या केवल 400 से थोड़ी अधिक ही थी। राजधानी कीव की सड़कों पर लोगों में युद्ध खत्म करने की इच्छा साफ दिखती है। ओलेक्जेडर नाम का एक व्यक्ति कहता है कि अगर हमने युद्ध नहीं रोका तो हम अपना और इलाका और लोग खो देंगे। उन्होंने इसकी तुलना जुए से की। उन्होंने कहा, यह जुए जैसा ही तो है- जितना ज्यादा खेलते जाओगे, उतना ही ज्यादा हारते जाओगे। कुल मिलाकर, यूक्रेन में सैनिक और नागरिक दोनों ही, इस युद्ध की कीमत अपने जीवन, जमीन और मनोबल से चुका रहे हैं। इसके बावजूद, उनके भीतर यह दुविधा बहुत गहरी है कि क्या शांति के लिए उन्हें अपने हिस्से की जमीन रूस को सौंप देनी चाहिए या लड़ाई जारी रखनी चाहिए ?














