ऐसे पहचानें अपने दिल की फीलिंग

आजकल लोग कहते हैं-लव एट फर्स्ट साइट। यानी पहली नजर में ही प्यार हो गया, लेकिन जरा रुकिए। क्या पहली मुलाकात में सच में प्यार हो सकता है या यह सिर्फ अट्रैक्शन होता है? आज की तेज रफ्तार जिंदगी में युवा अक्सर अफेक्शन और अट्रैक्शन के बीच फर्क नहीं कर पाते। थोड़ी सी पसंद, थोड़ी सी केयर और दिल मान लेता है कि यही सब कुछ है।
अफेक्शन या बस क्रश?
कई बार किसी को देखते ही दिल खुश रहने लगता है। उसके बारे में सोचना अच्छा लगता है, हर छोटी बात खास लगने लगती है। लेकिन जब आप उस इंसान को ठीक से जानते ही नहीं, तो यह अफेक्शन कैसे हो सकता है? ज्यादातर मामलों में यह शुरुआती अट्रैक्शन होता है, जो अफेक्शन जैसा महसूस होता है।
दिमाग के केमिकल्स करते हैं गेम
जब किसी की तरफ अट्रैक्शन होता है, तो दिमाग कुछ खास केमिकल्स रिलीज करता है जैसे डोपामाइन, नॉरपेनेफ्रिन और ऑक्सीटोसिन। डोपामाइन खुशी देता है, नॉरपेनेफ्रिन एक्साइटमेंट बढ़ाता है और ऑक्सीटोसिन जुड़ाव का एहसास कराता है। यही वजह है कि अट्रैक्शन के शुरुआती दिनों में सब कुछ परफेक्ट लगता है।
अट्रैक्शन क्या होता है?
अट्रैक्शन तेज होता है, अचानक आता है और कई बार जल्दी चला भी जाता है। इसमें रोमांच होता है, दिल तेज धड़कता है, लेकिन स्थिरता नहीं होती। आप सामने वाले के ख्यालों में खोए रहते हैं, जबकि रिश्ता बना भी नहीं होता। कई बार यह एकतरफा भी हो सकता है।
अट्रैक्शन के साफ संकेत
- बहुत जल्दी शुरू होना और उतनी ही जल्दी फीका पड़ना
- काम में मन न लगना, ध्यान भटकना
- शुरुआत में खुशी, बाद में कन्फ्यूजन
- खुद को ही समझाने की कोशिश करना कि सब ठीक है।
अफेक्शन क्या होता है?
अफेक्शन धीरे-धीरे बनता है। इसमें अपनापन, सम्मान और समझ होती है। अफेक्शन में आप सामने वाले की कमियों को भी स्वीकार करते हैं। यह सिर्फ एक्साइटमेंट नहीं, बल्कि एक सुकून भरा एहसास होता है। चाहे दोस्ती हो, परिवार हो या पार्टनर अफेक्शन समय के साथ गहराता है।
अफेक्शन और अट्रैक्शन में फर्क समझिए
अट्रैक्शन तेज होता है और अक्सर अस्थायी होता है, जबकि अफेक्शन स्थिर और लंबे समय तक रहने वाला होता है। अट्रैक्शन आंखों से शुरू होता है, अफेक्शन दिल और दिमाग दोनों से जुड़ा होता है।
इसलिए अगली बार जब दिल किसी के लिए धड़के, तो खुद से एक सवाल जरूर पूछिए यह अफेक्शन है या सिर्फ अट्रैक्शन?

















