30 साल की होमगार्ड की नौकरी, रिटायर होने के बाद अब मजदूरी करने को मजबूर हुए

पुष्पेन्द्र सिंह
αñ¡αÑïαñ¬αñ╛αñ▓αÑñ αñ«αñºαÑìαñ»αñ¬αÑìαñ░αñªαÑçαñ╢ αñ╣αÑïαñ«αñùαñ╛αñ░αÑìαñí αñòαÑï αñ¼αñ¿αÑç 78 αñ╕αñ╛αñ▓ αñ╣αÑï αñùαñÅ, αñ▓αÑçαñòαñ┐αñ¿ αñåαñ£ αñ¡αÑÇ αñ╣αñ« αñ╕αÑìαñ╡αñ»αñéαñ╕αÑçαñ╡αÑÇ αñ╣αÑêαñéαÑñ αñàαñºαñ┐αñòαñ╛αñéαñ╢ αñ╡αñ┐αñ¡αñ╛αñùαÑïαñé αñ«αÑçαñé αñ░αñ┐αñƒαñ╛αñ»αñ░αñ«αÑçαñéαñƒ αñòαÑÇ αñëαñ«αÑìαñ░ 62 αñ╡αñ░αÑìαñ╖ αñ╣αÑï αñùαñê, αñ╣αÑïαñ«αñùαñ╛αñ░αÑìαñí αñ«αÑçαñé 60 αñ╕αñ╛αñ▓ αñ╣αÑÇ αñ╣αÑêαÑñ αñ¿αñ┐αñ»αñ«αñ┐αññ αñòαñ░αñ¿αÑç αñöαñ░ αñ¬αÑçαñéαñ╢αñ¿ αñªαÑçαñ¿αÑç αñòαÑÇ αñ«αñ╛αñéαñù αñòαñ░αññαÑç-αñòαñ░αññαÑç αñ¼αÑéαÑ¥αÑç αñ╣αÑï αñùαñÅ, αñ¬αñ░ αñ¿αñ╣αÑÇαñé αñòαñ┐αñÅ αñùαñÅαÑñ’ αñ»αñ╣ αñòαñ╣αñ¿αñ╛ αñ╣αÑê- αñ╢αÑìαñ»αÑïαñ¬αÑüαñ░ αñ£αñ┐αñ▓αÑç αñòαÑç αñªαÑìαñ╡αñ╛αñ░αñòαñ╛ αñòαÑüαñ╢αñ╡αñ╛αñ╣αñ╛ αñòαñ╛αÑñ
पीपुल्स समाचार से बात करते हुए द्वारका कहते हैं 640 रुपए मासिक में भर्ती हुआ था और रिटायरमेंट तक पहुंचने पर 28 हजार रुपए मासिक मिले। मेरे परस एक बीघा से कम जमीन है। बेटा ने एमएससी की है, पर नौकरी नहीं। मुझे परिवार चलाने के लिए मजदूरी करना पड़ी। तीन माह का पैसा नहीं मिला तो एक फैक्ट्री में 10 हजार रु. मासिक में सुरक्षा गार्ड हूं। विभाग के अफसर कहते हैं-रेगुलर करने और पेंशन के प्रावधान नहीं हैं।
ये भी पढ़ें: 20 आईपीएस अफसरों के तबादले, प्रमोशन पाकर एसपी से डीआईजी बनने वालों को भी दी नई पदस्थापना
घरों में खाना बनाने का काम खोज रही
मैं सागर की रमा चौबे हूं। 2024 में रिटायर हुई। 29 साल नौकरी की। रिटायरमेंट के बाद खेती के लिए अपने गांव गई, लेकिन इतनी जमीन नहीं। वापस सागर आ गई। जो पैसा मिला था उससे एक छोटा से प्लॉट खरीदा, अब घर बनवाने के लिए पैसे नहीं। परिवार में सात लोग हैं। बेटे मजदूरी करते हैं। मैंने भी कई घरों में संपर्क किया है कि खाना बनाने का काम मिल जाए। हमें तो पेंशन भी नहीं मिलती। कोई आकर हमारी गरीबी तो देखे।
मंदिर में भजन-पूजन से चल रहा खर्च
मैं श्योपुर जिला विजयपुर का मुरारीलाल शर्मा। रिटायरमेंट के बाद मंदिर में भजन-पूजन कर रहे हैं। जो मिल जाता है, उसी से परिवार का खर्च चला रहे हैं। ग्रेच्युटी के ढाई लाख रुपए मिले थे, जो खर्च हो गए। बेटा भोपाल में मजदूर है। नगर पालिका में प्राइवेट नौकरी की तो वहां का पैसा नहीं मिला। अफसरों को हमारे जैसा जीवन जीना पड़े तो पता चलेगा कि जिंदगी क्या होती है।
ये भी पढ़ें: जनसंपर्क आयुक्त डॉ. खाड़े को इंदौर संभाग आयुक्त की जिम्मेदारी, दीपक सक्सेना बने कमिश्नर जनसंपर्क
बीमार हूं, दवाई के लिए पैसे नहीं
मैं ग्वालियर की 62 वर्षीय फिरदौस बानो हूं। वर्ष 1989 में होमगार्ड में भर्ती हुई तो 660 रुपए मिलते थे। रिटायर होने तक वेतन 26,400 रुपए तक पहुंचा। हार्ट की पेशेंट हूं, दवाई के लिए पैसे नहीं जुड़ पाते हैं। पति छह हजार रुपए में गार्ड की नौकरी कर रहे हैं। मेरे साथ विभाग ने फ्रॉड किया, नौकरी 33 साल की लेकिन बताया 27 साल। एक बेटी है, उसकी पढ़ाई के लिए पैसे नहीं जुड़ पाते हैं।
ये भी पढ़ें: स्पाइसजेट एयरलाइन ने क्रेडिट सुइस का 24 मिलियन डॉलर का बकाया चुकाया
विभाग के ही प्रमाण, फिर भी सब हवा हवाई
-11 नवंबर 2004 को होमगार्ड मुख्यालय ने गृह सचिव को लिखा पत्र लिखा।
-डिवीजनल कंमाण्डेंट नगर सैनिकों के परिवार पेंशन एवं ग्रेच्युटी की प्रशा. स्वीकृति के लिए सक्षम अधिकारी हैं।
-डीजी होमगार्ड यूएम जोशी ने 1 अक्टूबर 2001 के आदेश में होमगार्ड को एक शा. सेवक माना।
-जिससे उसके सहित परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति प्राप्त करने की वैधानिक पात्रता है।
-सीएम ने 14 जुलाई 2007 को खरगोन में होमगार्ड सैनिकों को नियमित करने की घोषणा की थी।
-2010 में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि होमगार्ड जवानों को पुलिस आरक्षक के समान सुविधाएं दी जाएं।
-मई 2025 की वेतन पर्ची गवाह है। कम्प्यूटर बता रहा कि होमगार्ड की रिटायरमेंट की अवधि 62 वर्ष है, पर आदेश की बात गोलमाल।

















