हमीदिया में जल्द मिलेगी सौगात : जापान से निकली कैथलैब दो दिन में पहुंचेगी इंडिया

- सिंतबर में शुरू होने की संभावना, किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों की भी हो सकेगी एंजियोग्राफी 
हमीदिया में जल्द मिलेगी सौगात : जापान से निकली कैथलैब दो दिन में पहुंचेगी इंडिया
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। सीटी स्कैन और एमआरआई के बाद हमीदिया अस्पताल में जल्द ही एक और सौगात मिलने वाली है। यहां हार्ट के मरीजों को प्रदेश की सबसे उन्नत कैथ लैब की सुविधा मिलेगी। करीब 7.7 करोड़ रुपए की कैथलैब जापान से भारत के लिए रवाना हो गई। समंदर के रास्ते भारत आ रही इस मशीन को मुंबई पोर्ट तक पहुंचने में दो से तीन दिन का समय लगेगा। इसके बाद यहां 15 दिन के कस्टम क्लियरेंस के बाद भोपाल के लिए रवाना किया जाएगा। सबकुछ ठीक रहा तो माह के अंत तक इस मशीन को हमीदिया अस्पताल में इंस्टॉल कर दिया जाएगा।

    मालूम हो कि बीते साल जनवरी में मौजूदा कैथलैब के खराब होने के बाद डिप्टी सीएम ने नई मशीन लगाने के निर्देश जारी किए थे। हालांकि इसके बाद नई मशीन के इंस्टॉलेशन को लेकर जगह का चयन नहीं हो सका। करीब एक साल में चार बार प्लान भी बदले, लेकिन किसी भी नतीजे पर पहुंच सके। हालांकि अंत में इसे हमीदिया अस्पताल की नई बिल्डिंग में ही लगाने का फैसला किया गया।

    एटोमिक एनर्जी बोर्ड से मिलेगी मंजूरी

    जानकारी के अनुसार मुंबई पोर्ट पर आने के बाद इस मशीन को एटोमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड में एंट्री कराना होगी। इसके बाद कस्टम क्लीयरेंस में सात दिन का समय लगेगा। यही इसी दौरान कैथलैब की कंपनी के इंजीनियर इस मशीन की तकनीकि जांच करेंगे। सभी एजेंसियों से क्लीयरेंस मिलने के बाद इसे सड़क के रास्ते भोपाल भेजा जाएगा। यहां आने के बाद 15 दिन इंस्टॉल किया जाएगा।

    किडनी रोगियों की भी होगी जांच

    कैथलैब में होने वाली एंजियोग्राफी एक जांच प्रक्रिया है। जिसमें हार्ट या ब्लड वेसल्स की स्थिति जानने के लिए कॉन्ट्रास्ट डाई का इस्तेमाल किया जाता है। यह डाई नसों के जरिए शरीर में पहुंचाई जाती है। सामान्य तौर पर यह डाई किडनी पर असर डालती है। ऐसे में पहले से कमजोर किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। नई मशीन में यह डाई किडनी पर असर नहीं करेगी।

    यह है मशीन की खासियत

    1. इस मशीन से जांच करने के दौरान बेहद कम डाई की जरूरत पड़ती है।
    2. मरीज की स्कैनिंग रिपोर्ट 3डी इमेज फॉर्म में आती है। जिससे ह्रदय व खून की नसों का बेहतर इमेज नजर आती है।
    3. यह मशीन हार्ट में ब्लॉकेज से लेकर अन्य समस्या की सटीक जानकारी देती है। जिससे डॉक्टर का काम आसान बन जाता है।
    4. जटिल सर्जरियां में भी मरीज में बेहतर रिजल्ट सामने आता है।
    5. एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी के दौरान दी जाने डाई कम संख्या में दी जाएगी।
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    मशीन एक दो दिन में भारत पहुंच जाएगी। इसके बाद कस्टम क्लियरेंस और अन्य काम होंगे। सिंतबर तक मरीजों को इसकी सुविधा मिलने लगेगी।
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