भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की ट्रैफिक स्टडी पूरी, तीन जगह होगा एक्सेस कंट्रोल

केंद्र सरकार से मिली सैद्धांतिक मंजूरी, सीएस अनुराग जैन को दिया प्रजेंटेशन
भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की ट्रैफिक स्टडी पूरी, तीन जगह होगा एक्सेस कंट्रोल
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम

    भोपाल। भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने के लिए केंद्र सरकार की सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने इस एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक स्टडी रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसमें 30,000 पैसेंजर कार यूनिट (पीसीयू) का अनुमान है। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को लेकर सीएस अनुराग जैन के समक्ष प्रजेंटेशन दिया जा चुका है। सरकार ने अपनी सहमति दे दी है। एक्सप्रेस-वे प्रारंभिक तौर पर फोर लेन होगा, लेकिन इसकी डिजाइन 8 लेन के हिसाब से होगी। इसमें प्रवेश के लिए एक्सेस कंट्रोल तीन जगह से होगा। हाइवे और एक्सस कंट्रोल मप्र के इकोनॉमिक कॉरिडोर व जोन के रूप में काम करेगा। इस तरह से राज्य सरकार की तरफ से तैयारी की जा रही है, इसके चलते राज्य सरकार की सहमति पर रूट के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है।

    तीन रूट प्रस्तावित : एक्सप्रेस-वे के लिए तीन रूट प्रस्तावित किए गए हैं। पहला रूट नीलबढ़ से चापड़ा रोड, दूसरा मंडीदीप से कसरावद और तीसरा मंडीदीप के आगे से लेकर इंदौर वेस्टर्न बायपास से जुड़ेगा। इस एक्सप्रेस-वे से महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के ट्रैफिक को सीधे इंदौर से जोड़ने का काम होगा। जबलपुर के ट्रैफिक को भोपाल के अंदर प्रवेश लेने के बजाय बाहर से डायवर्ट करने का प्रयास होगा। विशेष तौर पर मप्र के औद्योगिक क्षेत्रों के माल को पोर्ट तक पहुंचाने में भारी मदद मिलेगी।

    मुआवजा देगी केंद्र सरकार : ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने से लेकर भूमि अधिग्रहण और मुआवजा देने का काम केंद्र सरकार करेगी। माना जा रहा है कि इसका निर्माण सिंहस्थ के पहले तक पूरा हो जाएगा, जिससे कि वाहनों का आवागमन ज्यादा होने पर निर्माण की लागत वसूली जा सके। इससे उप्र, मप्र का कुछ हिस्सा, छत्तीसगढ़ और दक्षिणी राज्य कुछ हिस्से का ट्रैफिक को कंट्रोल किया जाएगा।

    200 किमी का होगा एक्सप्रेस-वे

    -यह एक्सप्रेस-वे करीब 170 से लेकर 200 किलोमीटर का होगा।

    -इससे भोपाल-इंदौर के बीच 35 से 40 किलोमीटर दूरी कम होगी।

    -एक घंटा कम लगेगा, अभी साढ़े तीन से चार घंटे लगते हैं।

    -यह बिल्कुल सीधा होगा, इसमें टर्न की गुंजाइश नहीं होगी।

    -भोपाल, सीहोर, देवास में इसमें वाहनों को प्रवेश दिया जाएगा।

    -लागत 6 हजार करोड़ अनुमानित है।

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    -प्रारंभिक चरण में चार लेन सड़क बनाई जाएगी।

    जिन प्रस्तावों पर सरकार सहमति देगी, उन पर होगा काम

    भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का सर्वे पूरा हो गया है। अलग-अलग जगह से तीन रूट प्रस्तावित हैं। सभी प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजे जाएंगे। जिन प्रस्तावों पर सरकार की सहमति होगी उस पर काम होगा। एसके सिंह, रीजनल ऑफिसर, एनएचएआई भोपाल

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