23 या 24 जनवरी… कब है बसंत पंचमी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व testing

बसंत पंचमी 2026 शुक्रवार, 23 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन मां सरस्वती की पूजा, अक्षर आरंभ और विद्या आराधना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 07:09 से 12:39 बजे तक रहेगा। पीले व श्वेत रंग का महत्व, पारंपरिक पूजा विधि औ
23 या 24 जनवरी… कब है बसंत पंचमी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व testing
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    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इस दिन को सरस्वती जयंती के रूप में भी पूजा जाता है।

    सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त 2026

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    मां सरस्वती की पूजा के लिए लगभग 5 घंटे 30 मिनट का विशेष शुभ समय प्राप्त होगा-

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    इस अवधि में पंचमी तिथि और पूर्वाह्न काल दोनों विद्यमान रहेंगे, इसलिए इस समय में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

    बसंत पंचमी पर बन रहे शुभ योग

    इस वर्ष बसंत पंचमी के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं-

    रवि योग: दोपहर 02:33 बजे से अगले दिन सुबह 07:08 बजे तक

    अभिजीत मुहूर्त: 12:17 PM से 01:01 PM

    विजय मुहूर्त: 02:29 PM से 03:13 PM

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन योगों में किया गया पूजन, विद्या आरंभ और नए कार्यों का संकल्प विशेष शुभ फल प्रदान करता है।

    बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व

    बसंत पंचमी को श्री पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है और पूरे भारत में प्रेम, उल्लास और आनंदपूर्ण परंपराओं के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास की शुक्ल पंचमी को माता सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे उनका जन्मदिन माना जाता है। इस दिन विद्या आरंभ या अक्षर अभ्यास करना तथा नए कार्यों की शुरुआत करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

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    बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा विधि

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    विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ब्रह्मा जी के मुख से देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं। बच्चों के लिए अक्षर आरंभ या विद्या आरंभ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी परंपरा के तहत सभी विद्यालयों और शिक्षा केंद्रों में बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर माता सरस्वती से बुद्धि, ज्ञान और कला में वृद्धि की प्रार्थना की जाती है।

    मां सरस्वती को शारदा देवी भी कहा जाता है। वे ज्ञान, विवेक, वाणी, संगीत, कला और विज्ञान की अधिष्ठात्री देवी हैं। मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन मां की आराधना करने से-

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    इसी कारण देशभर के विद्यालयों, गुरुकुलों और शिक्षण संस्थानों में इस दिन सामूहिक सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है।

    बसंत पंचमी में रंगों और प्रसाद का महत्व

    पीला रंग: शुभता, ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक।

    श्वेत रंग: शांति और पवित्रता का प्रतीक।

    भोग और मिठाई: पीले चावल या हलवा, दूध और श्वेत तिल से बनी मिठाइयां देवी को अर्पित की जाती हैं।

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