PU Special :सरकारी नौकरी के साथ युवाओं को पढ़ा रहे अधिकारी, फ्री कोचिंग से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे

रामचंद्र पांडेय, भोपाल। कोई छुट्टी के दिन क्लास लेता है, कोई ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों से जुड़ता है तो कोई जरूरतमंद युवाओं को व्यक्तिगत स्तर पर गाइड करता है। खास बात यह है कि इनमें से कई अधिकारी खुद भी कभी इसी राह से गुजरे हैं, इसलिए वे पढ़ाई के साथ तैयारी के दौरान आने वाली चुनौतियों और असफलताओं से निपटने का अपना अनुभव भी युवाओं के साथ साझा करते हैं। इन अधिकारियों का उद्देश्य आर्थिक परिस्थितियों को प्रतिभाशाली युवाओं के सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बनने देना है। शिक्षा के जरिए युवाओं को आगे बढ़ाने का यह सिलसिला नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ लगातार जारी है।
डॉ. रवीन्द्रनाथ सिंह सेवानिवृत्ति के बाद भी पढ़ा रहे
इनकम टैक्स विभाग में अपर सहायक संचालक (प्रशिक्षण) पद से सेवानिवृत्त डॉ. रवीन्द्रनाथ सिंह ने नौकरी के दौरान कोचिंग संस्थानों से जुड़कर हजारों विद्यार्थियों को नि:शुल्क मार्गदर्शन दिया। शिक्षा के प्रति उनका जुड़ाव सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी है और वर्तमान में वे इग्नू में अकादमिक काउंसलर हैं। अर्थशास्त्र में पीएचडी के साथ उन्होंने साइबर लॉ में पीजी, एलएलबी और बीएड की डिग्री भी हासिल की है।

उमाशंकर पचौरी ने ढाई लाख युवाओं को दी कोचिंग
मप्र राज्य सूचना आयोग के आयुक्त उमाशंकर पचौरी अब तक करीब ढाई लाख युवाओं को पीएससी, पीसीएस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क कोचिंग दे चुके हैं। नौकरी के साथ वे घर और शिक्षण संस्थानों में जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं और समय मिलते ही युवाओं को पढ़ाने में जुट जाते हैं। उनसे पढ़े करीब ढाई हजार युवा पुलिस इंस्पेक्टर समेत विभिन्न सरकारी पदों पर सेवाएं दे रहे हैं।

1983 से युवाओं को शिक्षा दे रहे शिवराज सिंह वर्मा
एडिशनल कमिश्नर शिवराज सिंह वर्मा को कक्षा नौवीं में गुरुजी से मिली सीख, युवाओं को शिक्षित करो, वे आगे बढ़ेंगे, ने आज तक शिक्षा से जोड़े रखा है। वे वर्ष 1983 से लगातार बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं और आज भी युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं। उनका मानना है कि अगर समाज को कुछ देना है और कोई बड़ी मदद नहीं कर सकते तो शिक्षा जरूर दें, इसी वजह से कोचिंग संचालक भी उन्हें विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने के लिए बुलाते हैं।

भोपाल RTO जितेंद्र शर्मा कराते हैं गणित और रीजनिंग की तैयारी
भोपाल आरटीओ जितेंद्र शर्मा सरकारी कामकाज के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को गणित और रीजनिंग की तैयारी कराते हैं। उनसे जुड़े छात्र आज भी जरूरत पड़ने पर अपने डाउट क्लियर करने के लिए उनसे संपर्क करते हैं और समय मिलने पर वे शिक्षण संस्थानों में जाकर बच्चों की विशेष क्लास भी लेते हैं। छुट्टियों के दौरान उनका मुख्य काम बच्चों को पढ़ाना ही रहता है।

डॉ. अनिल उपाध्याय ने असफलता को बनाया युवाओं की सफलता का जरिया
शिक्षक सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराने वाला नहीं, बल्कि सपनों को दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी होता है। डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय अपनी असफलता को हजारों युवाओं की सफलता में बदलने की प्रतिज्ञा के साथ यूपीएससी समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क कोचिंग दे रहे हैं। वर्ष 2014 में भोपाल के एमपी नगर से प्रतिज्ञा आईएएस अकादमी की शुरुआत हुई, जिसके माध्यम से पिछले 14 वर्षों से मध्यप्रदेश के करीब 34 जिलों के विद्यार्थियों को नि:शुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है।

आर्थिक स्थिति सपनों के रास्ते में न बने बाधा
इन अधिकारियों और शिक्षकों का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली युवा के सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर ये युवाओं की पढ़ाई की रणनीति बनाते हैं, विषय संबंधी उलझनें दूर करते हैं और कॅरियर को लेकर मार्गदर्शन देते हैं। शिक्षा के प्रति उनका यह जुड़ाव युवाओं को आगे बढ़ने के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा भी देता है।




















