Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

PU Special :Mobile Addiction-रील्स की लत छुड़ाने मोबाइल छीना तो घर छोड़ काम की तलाश में निकल गया किशोर

भोपाल में धार का 15 वर्षीय किशोर मोबाइल को लेकर पिता की डांट के बाद घर छोड़कर काम की तलाश में पहुंच गया। एक जागरूक नागरिक की सूचना पर उसे रेस्क्यू कर काउंसलिंग के बाद परिवार को सौंप दिया गया। विशेषज्ञों ने किशोरों के साथ मोबाइल के मुद्दे पर बंदिश के बजाय संवाद और भरोसे पर जोर दिया।
Mobile Addiction-रील्स की लत छुड़ाने मोबाइल छीना तो घर छोड़ काम की तलाश में निकल गया किशोर

पल्लवी वाघेला, भोपाल। बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया का बढ़ता आकर्षण अब परिवारों के बीच विवाद की वजह भी बन रहा है। मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर डांट या पाबंदी के बाद कई बच्चे जिद और नाराजगी में ऐसा कदम उठा लेते हैं, जिसकी कल्पना परिवार ने भी नहीं की होती। भोपाल में ऐसा ही मामला सामने आया, जहां धार जिले का 15 वर्षीय किशोर रील्स देखने की आदत पर पिता की डांट के बाद घर छोड़कर भोपाल पहुंच गया। पिता ने मोबाइल की मांग पर गुस्से में कह दिया था कि खुद कमाकर खरीद लेना। किशोर ने इस बात को गंभीरता से लिया और काम की तलाश में भोपाल आ गया। हालांकि, रोजगार मिलने से पहले ही एक जागरूक नागरिक की सूचना पर उसे रेस्क्यू कर लिया गया और आवश्यक प्रक्रिया के बाद परिवार को सौंप दिया गया।

पढ़ाई के कारण माता-पिता ने छीन लिया था मोबाइल

15 वर्षीय किशोर को सोशल मीडिया पर रील्स देखने की आदत थी। माता-पिता चाहते थे कि वह मोबाइल से दूरी बनाए और पढ़ाई पर ध्यान दे। इसी वजह से उन्होंने उसका मोबाइल छीन लिया। इस बात को लेकर पिता और बेटे के बीच कहासुनी हुई। पिता ने नाराजगी में कह दिया कि मोबाइल चाहिए तो खुद कमाकर खरीद लो। किशोर ने पिता की बात को चुनौती की तरह लिया और धार जिले स्थित अपने घर से निकल गया। वह काम की तलाश में भोपाल पहुंचा, ताकि पैसे कमाकर अपना मोबाइल खरीद सके। किशोर के मुताबिक, इंदौर और आसपास के क्षेत्र में उसके कई परिचित हैं, इसलिए उसने भोपाल आने का फैसला किया। उसे लगा कि राजधानी में काम के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं।

ये भी पढ़ें: PU Special : काउंसलिंग का असर, छह साल से मां से नफरत करने वाला बेटा बोला- हर महीने कुछ समय मां-बहन के साथ रहूंगा

काउंसलिंग में घर छोड़ने की वजह पता चली

इसी दौरान एक जागरूक नागरिक की नजर किशोर पर पड़ी और मामले की जानकारी संबंधित लोगों को दी गई। नाबालिग होने के कारण उसे सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। काउंसलिंग के दौरान घर से निकलने की वजह सामने आई। इसके बाद परिवार से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई और किशोर को परिजनों को सौंप दिया गया।

केवल बंदिश नहीं, संवाद भी जरूरी

साइकोलॉजिस्ट, डॉ. दीप्ति सिंघल के मुताबिक, किशोरावस्था में बच्चों के लिए दोस्तों से जुड़ाव, अपनी पसंद और स्वतंत्रता का एहसास महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में मोबाइल को लेकर अचानक सख्ती या गुस्से में कही गई बात बच्चे को अपमान या चुनौती की तरह महसूस हो सकती है। हर बच्चा ऐसी स्थिति में घर नहीं छोड़ता, लेकिन संवाद की कमी समस्या को बढ़ा सकती है। मोबाइल के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए केवल पाबंदी पर्याप्त नहीं है। अनुशासन के साथ संवाद और भरोसा भी जरूरी है।

ये भी पढ़ें: फैमिली कोर्ट के परामर्श के बाद  बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर दिखाई दिया सकारात्मक बदलाव

इन बातों का रखें ध्यान

मोबाइल के स्पष्ट नियम बनाएं: अचानक फोन छीनने के बजाय स्क्रीन टाइम और इस्तेमाल की समय-सीमा तय करें।

कारण समझाएं: बच्चे को बताएं कि जरूरत से ज्यादा रील्स देखने से पढ़ाई, नींद और दिनचर्या पर क्या असर पड़ सकता है।

गुस्से में चुनौती न दें: खुद कमाने या घर छोड़ने जैसी बातें गुस्से में भी न कहें। बच्चा इन्हें गंभीरता से ले सकता है।

विकल्प दें: खेलकूद, दोस्तों के साथ समय और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।

बच्चे की बात सुनें: मोबाइल की मांग के पीछे उसकी जरूरत, दोस्तों का प्रभाव या ऑनलाइन दुनिया से जुड़ाव समझने की कोशिश करें।

Devendra shakya
By Devendra shakya

Latest Posts