3,15,000 साल पुराने इंसान का चेहरा आया सामने, ये है दुनिया की सबसे पुरानी इंसानी तस्वीर

ब्राजीलिया (ब्राजील)। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे इंसान का चेहरा दोबारा बना दिया है, जो हमसे 3,15,000 साल पहले बिछड़ गया था। जीवाश्म के टुकड़ों से बनाई गई यह डिजिटल तस्वीर अब तक की सबसे पुरानी इंसानी शक्ल मानी जा रही है। इस तस्वीर में गहरे रंग का एक आदमी दिख रहा है, जिसके लंबे काले बाल, घनी दाढ़ी, गहरी आंखें, चौड़ी नाक और भरे हुए होंठ हैं। यह चेहरा मोरक्को के जेबेल इरहौद में एक खनिक को मिले अवशेषों के आधार पर बनाया गया है। यह जगह एक खनिज खदान है, जहां काम के दौरान ये प्राचीन अवशेष मिले थे।
मानव विकास के इतिहास को बदला
इस खोज ने मानव विकास के इतिहास को ही बदल दिया है। इससे पता चला है कि होमो सेपियंस यानी आधुनिक इंसान पहले की सोच से कम से कम 1,00,000 साल ज्यादा पुराने हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नए रिकंस्ट्रक्शन से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि हमारे पूर्वज शुरुआती दौर में कैसे दिखते थे और उनका विकास कैसे हुआ।
पहले किया था गलत आंकलन
'हेरिटेज' जर्नल में पब्लिश रिसर्च पेपर के अनुसार, "जेबेल इरहौद की साइट पर मिले होमो सेपियंस के जीवाश्म सबसे पुराने हैं, जो करीब 3,15,000 साल पुराने हैं।" यह स्टडी साइट की लेयर 7 से मिली थ्री-डायमेंशनल कंपोजिट खोपड़ी के डेटा पर आधारित फोरेंसिक फेशियल एप्रोक्सिमेशन पेश करती है।1960 के दशक में जब यह खोपड़ी पहली बार मिली थी, तब वैज्ञानिकों ने इसे निएंडरथल मानकर 40,000 साल पुराना समझा था। लेकिन 2017 में हुई जांच में पता चला कि यह असल में 3,15,000 साल पुरानी है और होमो सेपियंस की है।
कई चीजों से तैयार किया थ्री डी मॉडल
रिसर्चर्स ने 'इरहौद 1' नाम की इस खोपड़ी के स्कैन, फोटो और वीडियो फुटेज को पास में मिली जबड़े की हड्डी और दांतों के जीवाश्मों के साथ मिलाकर एक डिटेल्ड 3D मॉडल तैयार किया। उसके बाद मॉडर्न इंसानी बॉडी स्ट्रक्चर के एक मॉडल को डिजिटल तरीके से फॉसिल के साइज में ढाला गया। फिर उस ढांचे पर मसल्स, फैट और स्किन की लेयर जोड़ी गई, जिससे अवशेष को एक पूरा चेहरा मिल सका। इस प्रोसेस से चेहरे के दो वर्जन सामने आए। पहला ग्रे-स्केल में बना साइंटिफिक मॉडल है, जो खोपड़ी की अंदरूनी बनावट दिखाता है। दूसरा स्किन, बाल और दाढ़ी के साथ असली जैसा दिखने वाला रंगीन चित्र है, जो सबसे पुराने ज्ञात इंसानी पूर्वजों की झलक देता है। इस स्टडी को ब्राजील के 3D रिकंस्ट्रक्शन एक्सपर्ट सिसरो मोरेस ने लीड किया है।
आर्टिस्टिक कल्पना का भी इस्तेमाल किया
रिसर्चर्स ने बताया कि ज्यादा रियलिस्टिक दिखने वाले मॉडल में थोड़ी आर्टिस्टिक कल्पना का भी इस्तेमाल किया गया है। ऐसे इसलिए क्योंकि स्किन का रंग, लाइटिंग, बालों का स्टाइल और दाढ़ी जैसी चीजें सिर्फ फॉसिल से पता नहीं लगाई जा सकतीं। इसके बजाय, ये चीजें प्राचीन और आधुनिक इंसानी आबादी पर की गई मानव-विज्ञान संबंधी रिसर्च पर आधारित थीं, जिससे यह पता चलता है कि लगभग 3,15,000 साल पहले उत्तरी अफ्रीका में रहने वाला कोई व्यक्ति कैसा दिखता होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि डिजिटल मॉडल यह नहीं दिखाते कि कोई खास व्यक्ति कैसा दिखता था, क्योंकि रिकंस्ट्रक्शन पूरा करने के लिए इस्तेमाल किए गए फॉसिल के टुकड़े शायद अलग-अलग लोगों के थे।




















