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PU Special :भोपाल समेत देश के चारों डिमॉन्स्ट्रेशन स्कूलों का अस्तित्व संकट में, NCERT के रिसर्च सेंटर DMS को केंद्रीय विद्यालयों में मर्ज करने का प्लान  

एनसीईआरटी द्वारा संचालित भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और अजमेर के चार डिमॉन्स्ट्रेशन मल्टीपर्पज स्कूलों के केंद्रीय विद्यालय संगठन में विलय का प्रस्ताव चर्चा में है। पूर्व छात्रों और स्कूल से जुड़े लोगों ने इसका विरोध करते हुए इन्हें शिक्षा में प्रयोग और रिसर्च की प्रयोगशाला बताया है। प्रस्ताव को लेकर शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।
भोपाल समेत देश के चारों डिमॉन्स्ट्रेशन स्कूलों का अस्तित्व संकट में, NCERT के रिसर्च सेंटर DMS को केंद्रीय विद्यालयों में मर्ज करने का प्लान   

राजीव सोनी, भोपाल। देश में 1965 से स्कूली शिक्षा में प्रयोग और रिसर्च कर रहे एनसीईआरटी द्वारा संचालित चारों डिमॉन्स्ट्रेशन मल्टीपरपज स्कूल (DMS) के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। देश में केंद्रीय और नवोदय विद्यालयों के पाठ्यक्रम से लेकर शिक्षा की गुणवत्ता तय करने में भूमिका निभाने वाले इन चारों शैक्षणिक संस्थानों का विलय केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) में करने का प्लान है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी के अफसर भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और अजमेर में संचालित इन रीजनल स्कूलों का ‘डेथ सर्टिफिकेट’ तैयार करने की कवायद में जुटे हैं। इस विलय प्रस्ताव के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री और सचिव को ज्ञापन भी भेजे गए हैं।

पूर्व छात्रों ने प्रस्ताव को बेतुका बताया

देश के शैक्षणिक क्षेत्र में डिमॉन्स्ट्रेशन मल्टीपरपज स्कूलों (DMS) का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा हुआ माना जाता है। 60 साल के दौरान चारों रीजनल स्कूलों से हजारों छात्र निकले और देश-विदेश में उन्होंने अपना विशेष मुकाम बनाया। 1968 से 2010 तक के बैच में निकले हजारों पूर्व छात्रों की एल्युमिनी ‘डेमोलाइट’ में देश के कई नामी-गिरामी ब्यूरोक्रेट्स, वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, डॉक्टर-इंजीनियर और राजनेता भी शामिल हैं। ‘डेमोलाइट’ ने हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री और सचिव से मिलकर कतिपय विभागीय अफसरों के इस प्रस्ताव को ‘बेतुका’ बताते हुए डीएमएस के विलय को रोकने की मांग उठाई है।

शिक्षा प्रणाली की प्रयोगशाला

विभागीय सूत्रों का कहना है कि एनसीईआरटी यूनिवर्सिटी बनाने की कवायद के चलते यह बेतुका प्रस्ताव आया है। जिस तरह मेडिकल यूनिवर्सिटी का टीचिंग हॉस्पिटल और एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी का एक्सपेरिमेंटल फार्म होता है, वैसे ही ये डीएमएस संस्थान हैं। देश में एनसीईआरटी द्वारा केवीएस और डीएमएस, दोनों का ही संचालन किया जा रहा है। डीएमएस देश की शिक्षा प्रणाली की प्रयोगशाला है। शिक्षा में नवाचार और रिसर्च के इन केंद्रों को बंद करने के नुकसान भावी पीढ़ियों को भोगना पड़ेगा। केवीएस की शैक्षणिक गुणवत्ता कमतर नहीं है, लेकिन एजुकेशन सिस्टम को बेहतर करने के लिए डीएमएस में जो प्रयोग हो रहे हैं, उन पर विराम लग जाएगा।

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विचार-मंथन के दौर 

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी के अफसरों की इंटरनल मीटिंग्स में इस प्रस्ताव पर विचार-मंथन के दौर चल रहे हैं। स्कूलों के हेडमास्टर्स और स्टाफ से भी इस प्रस्ताव पर उनके विचार पूछे गए हैं। भोपाल के रीजनल स्कूल (डीएमएस) में नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक कुल 1000 छात्र अध्ययनरत हैं। कमोबेश यही संख्या भुवनेश्वर, अजमेर और मैसूर के स्कूलों की भी है। इन स्कूलों का मुख्य पाठ्यक्रम नवोदय और केंद्रीय विद्यालयों जैसा ही है। लेकिन कुछ प्रयोगात्मक नए पाठ्यक्रम ‘स्ट्रीम’ इन्हें सबसे अलग करते हैं।

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डीएमएस हमारे देश की धरोहर 

‘डेमोलाइट’ के अध्यक्ष संजय कुदेसिया ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए शिक्षा मंत्री और सचिव को पत्र भी भेजा है। उन्होंने कहा कि ये चारों संस्थान हमारे देश में एजुकेशन की एक्सपेरिमेंटल लेबोरेटरीज हैं। इन्हें बंद करना देश का बहुत बड़ा शैक्षणिक नुकसान होगा। ‘डेमोलाइट’ के सचिव सुकांत जैन बताते हैं कि यदि ऐसा होता है तो यह बहुत दुखद और अव्यावहारिक निर्णय होगा। ये प्रायोगिक विद्यालय हमारे देश की धरोहर हैं।

मर्जर प्रस्ताव का कारण नहीं मालूम 

“गवर्नमेंट की पॉलिसी है। मर्जर प्रस्ताव की बात सामने आई है, लेकिन कारण नहीं बताया गया। मीटिंग्स के दौर चल रहे हैं। भोपाल डीएमएस में करीब एक हजार बच्चे अध्ययनरत हैं।”

-प्रकाश श्रीवास्तव, हेडमास्टर, डीएमएस भोपाल

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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